शबे क़द्र की नमाज़ का तरीका: Shab e Qadr Ki Namaz Ka Tarika और इसकी फ़ज़ीलत

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shab e qadar ki namaz ka tarika
shab e qadar ki namaz ka tarika

शबे क़द्र की नमाज़ का तरीका (Shab E Qadr Ki Namaz Ka Tarika)

आप सभी को शबे क़द्र की बहुत-बहुत मुबारकबाद!
शबे क़द्र रमज़ान के पवित्र महीने की सबसे बरकत वाली रात है। इस रात को लैलतुल क़द्र भी कहा जाता है। इस पोस्ट में हम आपको शबे क़द्र की नमाज़ का तरीका (Shab E Qadr Ki Namaz Ka Tarika) और इसकी फ़ज़ीलत के बारे में विस्तार से बताएंगे।


शबे क़द्र क्या है?

शबे क़द्र रमज़ान की 27वीं रात को मनाई जाती है। यह वह रात है जब 26 रोज़े पूरे हो जाते हैं और 26वें रोज़े की इफ्तारी से लेकर 27वें रोज़े की सेहरी तक का समय शबे क़द्र होता है। इस रात की बहुत अधिक फ़ज़ीलत है, और इसमें इबादत करने वालों को अल्लाह तआला की विशेष रहमत और मग़फ़िरत प्राप्त होती है।


शबे क़द्र की फ़ज़ीलत

शबे क़द्र की फ़ज़ीलत को क़ुरआन में सूरह अल-क़द्र में बयान किया गया है। इस रात में फ़रिश्ते धरती पर उतरते हैं और रहमत की बारिश होती है। यह रात हज़ार महीनों से भी बेहतर है। इसलिए, इस रात को इबादत, नमाज़, दुआ और तिलावत में गुज़ारना चाहिए।


शबे क़द्र की नमाज़ का तरीका (Shab E Qadr Ki Namaz Ka Tarika)

1. चार रकअत नफ्ल नमाज़

  • नियत:
    नियत करें कि मैं चार रकअत नमाज़ शबे क़द्र की नफ्ल की वास्ते अल्लाह तआला के पढ़ रहा/रही हूँ।
  • तरीका:
    • पहली रकअत में सूरह फातिहा के बाद सूरह अल-क़द्र (इन्ना अन्जलना) 3 बार और सूरह इखलास (कुल हुवल्लाहु) 50 बार पढ़ें।
    • दूसरी रकअत में भी सूरह फातिहा के बाद सूरह अल-क़द्र 3 बार और सूरह इखलास 50 बार पढ़ें।
    • दो रकअत के बाद क़अदा में तशह्हुद, दुरूद और दुआ पढ़ें।
    • तीसरी और चौथी रकअत में भी उसी तरह सूरह फातिहा, सूरह अल-क़द्र और सूरह इखलास पढ़ें।
    • नमाज़ के बाद यह तस्बीह पढ़ें:
      सुब्हानल्लाहि वल हम्दु लिल्लाहि वला इलाहा इल्लल्लाहु वल्लाहु अकबर।

2. दो रकअत नफ्ल नमाज़

  • नियत:
    नियत करें कि मैं दो रकअत नमाज़ शबे क़द्र की नफ्ल की वास्ते अल्लाह तआला के पढ़ रहा/रही हूँ।
  • तरीका:
    • पहली रकअत में सूरह फातिहा के बाद सूरह अल-क़द्र 1 बार और सूरह इखलास 20 बार पढ़ें।
    • दूसरी रकअत में भी सूरह फातिहा के बाद सूरह अल-क़द्र 1 बार और सूरह इखलास 20 बार पढ़ें।
    • नमाज़ के बाद सूरह इखलास 500 बार, अस्तग़फार 100 बार और दुरूद शरीफ़ 100 बार पढ़ें।

3. सौ रकअत नफ्ल नमाज़

  • नियत:
    नियत करें कि मैं सौ रकअत नमाज़ शबे क़द्र की नफ्ल की वास्ते अल्लाह तआला के पढ़ रहा/रही हूँ।
  • तरीका:
    • हर दो रकअत में सूरह फातिहा के बाद सूरह अल-क़द्र 1 बार और सूरह इखलास 3 बार पढ़ें।
    • हर दो रकअत के बाद सलाम फेरें और दुरूद शरीफ़ 10 बार पढ़ें।

शबे क़द्र में पढ़ने वाली दुआ (Shab E Qadr Ki Dua)

शबे क़द्र में यह दुआ पढ़ने की सुन्नत है:
अल्लाहुम्मा इन्नका अफुव्वुन तुहिब्बुल अफ़वा फ़अफु अन्नी या ग़फूर।
अर्थ: “ऐ अल्लाह! निश्चय ही तू माफ़ करने वाला है, माफ़ी को पसंद करता है, इसलिए मुझे माफ़ कर दे।”


शबे क़द्र की नमाज़ की फ़ज़ीलत

  • इस नमाज़ को पढ़ने से अल्लाह तआला की रहमत और बरकत प्राप्त होती है।
  • शबे क़द्र की नमाज़ पढ़ने वाले के गुनाह माफ़ हो जाते हैं।
  • यह नमाज़ इंसान को अल्लाह के करीब लाती है और उसकी ज़िंदगी में बरकत लाती है।

निष्कर्ष

शबे क़द्र की रात को इबादत, नमाज़ और दुआ में गुज़ारना हर मुसलमान के लिए बेहद फ़ज़ीलत वाला काम है। शबे क़द्र की नमाज़ का तरीका (Shab E Qadr Ki Namaz Ka Tarika) और दुआ को याद करके इस मुबारक रात का पूरा फायदा उठाएं। अल्लाह हम सबकी इबादत और दुआओं को कुबूल करे। आमीन!

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