अस्सलामो अलैकुम भाइयों और बहनों! शबे कद्र की रात बेहद मुबारक और बरकतों वाली रात है। यह वह रात है जिसमें अल्लाह तआला अपने बंदों को मग़फ़िरत और रहमत से नवाज़ता है। इस पोस्ट में हम आपको Shab E Qadr Ki Dua (शबे कद्र में पढ़ने वाली दुआ) और इसकी फ़ज़ीलत के बारे में बताएंगे।
किस्मत वाला है वो जिसे शबे क़द्र मिली और उसने इबादत में ये रात गुजारी ! शबे क़द्र की नमाज़ का तरीका हमने इससे पहले पोस्ट में बताया था इस पोस्ट में शबे क़द्र की दुआ ( Shab E Qadr Ki Dua ) बताई है वो पोस्ट न पढ़ी हो तो निचे दी गयी लिंक पे क्लिक करे !
क़ुर्बान जाईये हम सब के आका हुजूर सल्लाहु अलैहि वसल्लम की जाते गिरामी पर जिन्होने हमें क़दम क़दम पर जीने का सही तरीका बताया और ऐसी तालीम अता फ़रमाई की जिसपे अमल करके है हम अपनी जिंदगी और आख़िरत दोनों को संवार सकते है
लैलतुल क़द्र पर फ़रिश्तो का नुज़ूल होता है और रेहमत की बारिश होती है इस मुबारक रात में ! तो इस मुबारक रात को यूँही ना गवाईये ! बल्कि इबादत में गुजारिये और अल्लाह तबारक वतआला से रो-रोकर मग़फ़िरत की दुआ कीजिये ! क्या पता अगले साल हमें नसीब हो नहो !
जो भी आपसे नाराज हो उन्हें मनाओ , जिनसे आप नाराज हो उनसे खुद ही बातचीत का सिलसिला आगे बढ़ाओ ! अपने बड़ो से मुआफी मांगो। और अल्लाह से अपने बुजुर्गी के लिए मग़फ़िरत की दुआ मांगो ! इस रात है ,लिहाजा इस रात में कसरत से दुआ कीजिये
शबे कद्र की दुआ क्या है?
शबे कद्र की दुआ वह दुआ है जिसे हज़रत आयशा (रजियल्लाहु अन्हा) ने पूछा था और नबी-ए-करीम (सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम) ने उन्हें सिखाया था। यह दुआ इस प्रकार है:
Shab E Qadr Ki Dua:
अल्लाहुम्मा इन्नका अफुव्वुन तुहिब्बुल अफ़वा फ़अफु अन्नी या ग़फूर
शबे कद्र की दुआ का अर्थ:
“ऐ अल्लाह! निश्चय ही तू माफ़ करने वाला है, माफ़ी को पसंद करता है, इसलिए मुझे माफ़ कर दे।”
उम्मुल मोमिनीन हज़रते सय्यि-दतुना आइशा रदियल्लाहु तआला अन्हु रिवायत फरमाती है की मैंने अपने सरताज साहिबे मेराज सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम की ख़िदमते बा बरकत में अर्ज़ की – या रसूलल्लाह सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम अगर मुझे शबे क़द्र का इल्म हो जाए तो क्या पढूं !
सरकारे अबद क़रार शफ़िए रोज़े शुमार सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम ने इरशाद फ़रमाया ! इस तरह दुआ मांगो !
अल्लाहुम-म इन्न-क अफ़ूवुन करीमु तुहिब्बुल अफ़ व फ़अ्फ़ु अन्नी ०
तर्जुमा- बेशक तू मुआफ फ़रमाने वाला , दर गुज़र फ़रमाने वाला है ! और मुआफ करने को पसंद फ़रमाता है लिहाज़ा मुझे मुआफ़ फ़रमा दे !
शबे कद्र की दुआ की फ़ज़ीलत:
- इस दुआ को पढ़ने से अल्लाह तआला की रहमत और मग़फ़िरत प्राप्त होती है।
- यह दुआ शबे कद्र की रात में पढ़ने से अधिक फलदायी होती है।
निष्कर्ष:
शबे कद्र की रात को इबादत और दुआ में गुज़ारें। Shab E Qadr Ki Dua को याद करें और इसकी फ़ज़ीलत हासिल करें। अल्लाह हम सबकी जायज दुआओं को कुबूल करे। आमीन!